shayrana.org
Mere bare mein apni soch ko thoda badalkar dekh | Shayrana.org
​मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख । मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकलकर देख ।शराफ़त से मुझे नफ़रत है ये जीने नहीं देती,कि तुझको तोड़ लेंगे लोग तू फूलों सा खिलकर देख ।ज़रुरी तो नहीं जो दिख रहा है सच मेँ वैसा होज़मीं को जानना है ग़र तो बारिश में फिसलकर देख ।पता लग जाएगा अपने ही सब बदनाम करते हैं ।कभी ऊँचाइयोँ पर तू भी अपना नाम लिखकर देख ।अगर मैँ कह नहीं पाया तो क्या चाहा नहीं तुझकोमोहब्बत की सनद चाहे तो मेरे घर पे चलकर देख ।तुझे ही सब ज़माने में बुरा कहते हैँ क्यों 'फ़ैसल'बिखर जाएगा यूँ ना सोच दीवाने संभलकर देख । siraj faisal khan