shayrana.org
Aag seene mein muhabbat ki laga dete hai | Shayrana.org
​आग सीने में मोहब्बत की लगा देते हैं "मीर" मिलते हैं मुझे जब भी रुला देते हैंएक तुम हो कि गुनाह कह के टाल जाते होएक "ग़ालिब" हैं कि हर रोज़ पिला देते हैंमैंने "राहत" से कहा फूँक दो दिल की दुनियावो मेरे ख़त को उठाते हैं जला देते हैंजब भी "राना" से मोहब्बत का पता पूछता हूँहँस के माँ पर वो कोई शे'र सुना देते हैं । siraj faisal khan