shayrana.org
Mohabbato me dikhawe ki | Shayrana.org
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिला अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी ना मिला घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे बहुत तलाश किया कोई आदमी ना मिला तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड आया था फिर इसके बाद मुझे कोई अजनबी ना मिला बहुत अजीब है ये कुरबतों की दूरी भी वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी ना मिला खुदा की इतनी बड़ी कायनात में मैंने बस एक शख्स को मांगा मुझे वही ना मिला Bashir badr