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Kafas mein rehke khula aasman bhool gaye | Shayrana.org
क़फ़स में रहके खुला आसमान भूल गए फिर उसके बाद परिन्दे उड़ान भूल गए हर एक शख़्स इशारों में बात करता है ये क्या हुआ कि सब अपनी ज़ुबान भूल गए ज़मीं का होश रहा और न आसमाँ की ख़बर किसी की याद में दोनों जहान भूल गए फरिश्ते खुशियों के आए थे बाँटने ख़ुशियाँ वो सबके घर गए मेरा मकान भूल गए सबक़ वो हमको पढ़ाए हैं ज़िन्दगी ने कि हम मिला था जो भी किताबों से ज्ञान भूल गए वो खुशनसीब हैं, सुनकर कहानी परियों की जो अपनी दर्द भरी दास्तान भूल गए Rajesh Reddy