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Mere khuda main apne khayaalo ka kya karoon | Shayrana.org
मेरे ख़ुदा मैं अपने ख़यालों को क्या करूँ अंधों के इस नगर में उजालों को क्या करूँ चलना ही है मुझे मेरी मंज़िल है मीलों दूर मुश्किल ये है कि पाँवों के छालों को क्या करूँ दिल ही बहुत है मेरा इबादत के वास्ते मस्जिद को क्या करूँ मैं शिवालों को क्या करूँ मैं जानता हूँ सोचना अब एक जुर्म है लेकिन मैं दिल में उठते सवालों को क्या करूँ जब दोस्तों की दोस्ती है सामने मेरे दुनिया में दुश्मनी की मिसालों को क्या करूँ Rajesh reddy