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Hamare aage tera jab kisi ne naam liya | Shayrana.org
हमारे आगे तेरा जब किसी ने नाम लिया दिल-ए-सितम-ज़दा को हमने थाम-थाम लिया ख़राब रहते थे मस्जिद के आगे मयख़ाने निगाह-ए-मस्त ने साक़ी की इंतक़ाम लिया वो कज-रविश न मिला मुझसे रास्ते में कभू न सीधी तरहा से उसने मेरा सलाम लिया मेरे सलीक़े से मेरी निभी मोहब्बत में तमाम उम्र मैं नाकामियों से काम लिया अगरचे गोशा-गुज़ीं हूँ मैं शाइरों में 'मीर' प' मेरे शोर ने रू-ए-ज़मीं तमाम किया Mir taqi mir