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Kuchh karo fikr mujh diwane ki | Shayrana.org
कुछ करो फ़िक्र मुझ दीवाने की धूम है फिर बहार आने की वो जो फिरता है मुझ से दूर ही दूर है ये तरकीब जी के जाने की तेज़ यूँ ही न थी शब-ए-आतिश-ए-शौक़ थी खबर गर्म उस के आने की जो है सो पाइमाल-ए-ग़म है मीर चाल बेडोल है ज़माने की Mir taqi mir