shayrana.org
Umr bhar ham rahe sharabi se | Shayrana.org
उम्र भर हम रहे शराबी से दिल-ए-पुर्खूं की इक गुलाबी से खिलना कम-कम कली ने सीखा है उसकी आँखों की नीम ख़्वाबी से काम थे इश्क़ में बहुत ऐ मीर हम ही फ़ारिग़ हुए शताबी से Mir taqi mir