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यूँ कभी किसी पे … | Shayrana.org
यूँ कभी किसी पे गुस्सा आता है फ़िर सोचता हूँ ये क्या आता है। कोई ऐसा है कि भूलना भी चाहूँ दबे पाँव दिल में चला आता है। तुम लड़ते हो, लड़ते ही रहना साथ में ऐसे ही मज़ा आता है। जुबाँ पे हो ताला,आँखें भी बंद ये चेहरा सब कुछ बता आता है। क्या क्या गंवाता है गाँव में वो शहर से जो रोटी कमा आता है। माँ की आँख जब लग जाती है पाँव चुपके से वो दबा आता है। #नीलाभ