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वो आँखों से डसती है … | Shayrana.org
वो आँखों से डसती है रोना आए तो हँसती है। किरदार और बाकी हैं सोच ज़रा ये डरती है। है बाँध आने ही वाला मद्धम मद्धम बहती है। उसकी नियति है ऐसी उम्र से आगे चलती है। गुलाब है वो,फ़िर क्यूँ काँटों जैसा खलती है। दिखता है चूल्हा चौका क ख ग घ पढ़ती है। #नीलाभ