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तुम्हारे चले जाने … | Shayrana.org
तुम्हारे चले जाने का बहुत मलाल न था मगर इस होली थाल में सुर्ख़ गुलाल न था। सुना था जिंदगी मुकम्मल होती है जवाबों से जो मौत आयी पास उसके कोई सवाल न था। भरी दुपहरी लोगों के भीतर इंसां सो रहे क्या इक भूखा बिलख रहा और कोई बवाल न था। रंग बिरंगे फूल कब्र पे हँसते हँसते डाल दिए कोई मर जाए तो रोते हैं , ये ख़्याल न था। #नीलाभ