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Tere ishq ki intha chahta hoon | Shayrana.org
तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ सितम हो कि हो वादा-ए-बेहिजाबीकोई बात सब्र-आज़मा चाहता हूँ ये जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों कोकि मैं आप का सामना चाहता हूँ कोई दम का मेहमाँ हूँ ऐ अहल-ए-महफ़िलचिराग़-ए-सहर हूँ, बुझा चाहता हूँ भरी बज़्म में राज़ की बात कह दीबड़ा बे-अदब हूँ, सज़ा चाहता हूँ Allama iqbal