shayrana.org
Gulzaar-e-hast-o-boo na begaana waar dekh | Shayrana.org
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बू न बेगानावार देखहै देखने की चीज़ इसे बार बार देख आया है तो जहाँ में मिसाल-ए-शरर देखदम दे नजये हस्ती-ए-नापायेदार देख माना के तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैंतू मेरा शौक़ देख मेरा इंतज़ार देख खोली हैं ज़ौक़-ए-दीद ने आँखें तेरी तो फिरहर रहगुज़र में नक़्श-ए-कफ़-ए-पाय-ए-यार दे Allama iqbal