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Ham bhi sharaabi tum bhi sharaabi | Shayrana.org
हम भी शराबी, तुम भी शराबी छलके गुलाबी, छलके गुलाबीतक़्दीर दिल कि ख़ाना ख़राबीजब तक है जीना खुश हो के जी लेंजब तक है पीना जी भर के पी लेंहरत न कोइ रह जाये बाक़ीकल सुबह के दामन में, तुम होगे न हुम होंगेबस रेत के सीने पर कुछ नक्श क़दम होंगेबस रात भर के मेहमान हम हैंज़ुल्फ़ों में शब के थोडे से कम हैंबाक़ी रहेगा सागर न साक़ी Ali sardar zafri