shayrana.org
Fir wahi maange huye lamhe | Shayrana.org
फिर वही माँगे हुए लम्हे, फिर वही जाम-ए-शराब फिर वही तारीक रातों में ख़याल-ए-माहताबफिर वही तारों की पेशानी पे रंग-ए-लाज़वालफिर वही भूली हुई बातों का धुंधला सा ख़यालफिर वो आँखें भीगी भीगी दामन-ए-शब में उदासफिर वो उम्मीदों के मदफ़न ज़िन्दगी के आस-पासफिर वही फ़र्दा की बातें फिर वही मीठे सराबफिर वही बेदार आँखें फिर वही बेदार ख़्वाबफिर वही वारफ़्तगी तनहाई अफ़सानों का खेलफिर वही रुख़्सार वो आग़ोश वो ज़ुल्फ़-ए-सियाहफिर वही शहर-ए-तमन्ना फिर वही तारीक राहज़िन्दगी की बेबसी उफ़्फ़ वक़्त के तारीक जालदर्द भी छिनने लगा उम्मीद भी छिनने लगीमुझ से मेरी आरज़ू-ए-दीद भी छिनने लगीफिर वही तारीक माज़ी फिर वही बेकैफ़ हालफिर वही बेसोज़ लम्हें फिर वही जाम-ए-शराबफिर वही तारीक रातों में ख़याल-ए-माहताब Ali sardar zafri