shayrana.org
Baithai jayengi parde mein bibiyan kab tak | Shayrana.org
बिठाई जाएंगी परदे में बीबियाँ कब तक बने रहोगे तुम इस मुल्क में मियाँ कब तकहरम-सरा की हिफ़ाज़त को तेग़ ही न रहीतो काम देंगी यह चिलमन की तितलियाँ कब तकमियाँ से बीबी हैं, परदा है उनको फ़र्ज़ मगरमियाँ का इल्म ही उट्ठा तो फिर मियाँ कब तकतबीयतों का नमू है हवाए-मग़रिब मेंयह ग़ैरतें, यह हरारत, यह गर्मियाँ कब तकअवाम बांध ले दोहर को थर्ड-वो-इंटर मेंसिकण्ड-ओ-फ़र्स्ट की हों बन्द खिड़कियाँ कब तकजो मुँह दिखाई की रस्मों पे है मुसिर इब्लीसछुपेंगी हज़रते हव्वा की बेटियाँ कब तकजनाबे हज़रते 'अकबर' हैं हामिए-पर्दामगर वह कब तक और उनकी रुबाइयाँ कब तक Akbar Allahbadi