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Jaan hi lene ki hikmat mein tarrakki dekhi | Shayrana.org
जान ही लेने की हिकमत में तरक़्क़ी देखी मौत का रोकने वाला कोई पैदा न हुआउसकी बेटी ने उठा रक्खी है दुनिया सर परख़ैरियत गुज़री कि अंगूर के बेटा न हुआज़ब्त से काम लिया दिल ने तो क्या फ़ख़्र करूँइसमें क्या इश्क की इज़्ज़त थी कि रुसवा न हुआमुझको हैरत है यह किस पेच में आया ज़ाहिददामे-हस्ती में फँसा, जुल्फ़ का सौदा न हुआ Akbar Allahbadi