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Yahi tohfa hai yahi nazrana | Shayrana.org
यही तोहफ़ा है यही नज़राना मैं जो आवारा नज़र लाया हूँ रंग में तेरे मिलाने के लिये क़तरा-ए-ख़ून-ए-जिगर लाया हूँ ऐ गुलाबों के वतन पहले कब आया हूँ कुछ याद नहीं लेकिन आया था क़सम खाता हूँ फूल तो फूल हैं काँटों पे तेरे अपने होंटों के निशाँ पाता हूँ मेरे ख़्वाबों के वतन चूम लेने दे मुझे हाथ अपने जिन से तोड़ी हैं कई ज़ंजीरे तूने बदला है मशियत का मिज़ाज तूने लिखी हैं नई तक़दीरें इंक़लाबों के वतन फूल के बाद नये फूल खिलें कभी ख़ाली न हो दामन तेरा रोशनी रोशनी तेरी राहें चाँदनी चाँदनी आंगन तेरा माहताबों के वतन Kaifi azmi