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Alfaaz narm ho gaye lehje badal gaye | Shayrana.org
अल्फ़ाज नर्म हो गए लहजे बदल गए लगता है ज़ालिमों के इरादे बदल गए ये फ़ाएदा ज़रूर हुआ एहतिजाज से जो ढो रहे थे हम को वो काँधे बदल गए अब ख़ुशबुओं के नाम पते ढूँडते फिरो महफ़िल में लड़कियों के दुपट्ट बदल गए ये सरकशी कहाँ है हमारे ख़मीर में लगता है अस्पताल में बच्चे बदल गए कुछ लोग है जो झेल रहे हैं मुसीबतें कुछ लोग हैं जो वक़्त से पहले बदल गए मुझ को मिरी पसंद का सामे तो मिल गया लेकिन ग़ज़ल के सारे हवाले बदल गए Shakeel zamali