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Dar to mujhe kiska hai ke main kuchh nahi kehta | Shayrana.org
डर तो मुझे किसका है के मैं कुछ नहीं कहता| पर हाल ये अफ़्शाँ है के मैं कुछ नहीं कहता| नासेह ये गिला है के मैं कुछ नहीं कहता, तू कब मेरी सुनता है के मैं कुछ नहीं कहता| कुछ ग़ैर से होंठों में कहे है जो पूछो, तो वहीं मुकरता है के मैं कुछ नहीं कहता| नासेह को जो चाहूँ तो अभी ठीक बना दूँ, पर ख़ौफ़ ख़ुदा का है के मैं कुछ नहीं कहता| चुपके से तेरे मिलने का घर वालों में तेरे, इस वास्ते चर्चा है के मैं कुछ नहीं कहता| ऐ चारागरो क़बिल-ए-दरमाँ नहीं ये दर्द, वर्ना मुझे सौदा है के मैं कुछ नहीं कहता| हर वक़्त है दुश्नाम हर एक बात पे ताना, फिर इस पे भी कहता है के मैं कुछ नहीं कहता| "मोमिन" बा-ख़ुदा सिहर बयानी का जभी तक, हर एक को दावा है के मैं कुछ नहीं कहता| Momin khan momin