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Dil qabil e muhabbat e Jana nahi raha | Shayrana.org
दिल क़ाबिल-ए-मोहब्बत-ए-जानाँ नहीं रहा वो वलवला, वो जोश, वो तुग़याँ नहीं रहाकरते हैं अपने ज़ख़्म-ए-जिगर को रफ़ू हम आप कुछ भी ख़्याल-ए-जुम्बिश-ए-मिज़गाँ नहीं रहा क्या अच्छे हो गए कि भलों से बुरे हुए यारों को फ़िक्र-ए-चारा-ओ-दरमाँ नही रहा किस काम के रहे जो किसी से रहा न काम सर है मगर ग़ुरूर का सामाँ नहीं रहा मोमिन ये लाफ़-ए-उलफ़त-ए-तक़वा है क्यों अबस दिल्ली में कोई दुश्मन-ए-ईमाँ नहीं रहा Momin khan momin