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Teri har baat chalkar yoon bhi mere jee se aati hai | Shayrana.org
तेरी हर बात चलकर यूँ भी मेरे जी से आती है कि जैसे याद की खुश्बू किसी हिचकी से आती है।कहाँ से और आएगी अक़ीदत की वो सच्चाईजो जूठे बेर वाली सरफिरी शबरी से आती है।बदन से तेरे आती है मुझे ऐ माँ वही खुश्बूजो इक पूजा के दीपक में पिघलते घी से आती है।उसी खुश्बू के जैसी है महक। पहली मुहब्बत कीजो दुलहिन की हथेली पर रची मेंहदी से आती है।हजारों खुशबुएँ दुनिया में हैं पर उससे छोटी हैंकिसी भूखे को जो सिकती हुई रोटी से आती है।मेरे घर में मेरी पुरवाइयाँ घायल पड़ी हैं अबकोई पछवा न जाने कौन सी खिड़की से आती है।ये माना आदमी में फूल जैसे रंग हैं लेकिन'कुँअर' तहज़ीब की खुश्बू मुहब्बत से ही आती है। Kunwar bechain