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Kabhi chalta hua chanda kabhi taara batata hai | Shayrana.org
कभी चलता हुआ चंदा कभी तारा बताता है ज़माना ठीक है जो मुझको बंजारा बताता है।तुम्हारा क्या, तुम अपनी नींद की ये गोलियां खाओहै गहरी नींद क्या, यह तो थका-हारा बताता है।सँवारा वक़्त ने उसको, कि जिसने वक़्त को समझानहीं तो वक़्त क्या है, वक़्त का मारा बताता है।ये आंसू हैं नमी दिल की, यही कहती रही दुनियामगर आंसू तो खुद को जल में अंगारा बताता है।तज़ुर्बा मार्गदर्शक है, इसी से राह पूछेंगेये वो है, भूलने पर राह दोबारा बताता है।सुनो साधो, कि इक साधे से सध जाती है सब दुनियाकिसी भी एक के हो लो, ये इकतारा बताता है।नदी को मिलना था सो मिल गई जाकर समुन्दर सेभले ही ये जहाँ सारा, उसे खारा बताता है।घरों में रहनेे वालों के , ये रिश्ते किस तरह के हैं'कुँअर' इस बात को, कब ईंट या गारा बताता है। Kunwar bechain