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Usko juda hue bhi jamana bahut hua | Shayrana.org
उसको जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ अब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआढलती न थी किसी भी जतन से शब-ए-फ़िराक़ऐ मर्ग-ए-नागहाँ तेरा आना बहुत हुआहम ख़ुल्द से निकल तो गये हैं पर ऐ ख़ुदाइतने से वाक़ये का फ़साना बहुत हुआअब हम हैं और सारे ज़माने की दुश्मनीउससे ज़रा रब्त बढ़ाना बहुत हुआअब क्यों न ज़िन्दगी पे मुहब्बत को वार दें इस आशिक़ी में जान से जाना बहुत हुआ अब तक तो दिल का दिल से तार्रुफ़ न हो सकामाना कि उससे मिलना मिलाना बहुत हुआ क्या-क्या न हम ख़राब हुए हैं मगर ये दिल ऐ याद-ए-यार तेरा ठिकाना बहुत हुआकहता था नासेहों से मेरे मुँह न आईओफिर क्या था एक हू का बहाना बहुत हुआलो फिर तेरे लबों पे उसी बेवफ़ा का ज़िक्र अहद "फ़राज़" तुझसे कहा ना बहुत हुआ Ahmed Faraz