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Dhoop bahut hai mausam jal thal bhejo na | Shayrana.org
धूप बहुत है मौसम जल-थल भेजो न बाबा मेरे नाम का बादल भेजो न मोल्सरी की शाख़ों पर भी दिये जलें शाख़ों का केसरया आँचल भेजो न नन्ही मुन्नी सब चेहकारें कहाँ गईं मोरों के पैरों की पायल भेजो न बस्ती बस्ती दहशत किसने बो दी है गलियों बाज़ारों की हलचल भेजो न सारे मौसम एक उमस के आदी हैं छाँव की ख़ुश्बू, धूप का संदल भेजो न मैं बस्ती में आख़िर किस से बात करूँ मेरे जैसा कोई पागल भेजो न #Rahat_indori