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Samandaron mein muafik hawa chalata hai | Shayrana.org
समन्दरों में मुआफिक हवा चलाता है जहाज़ खुद नहीं चलते खुदा चलाता है ये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आये वो हम नहीं हैं, जिन्हें रास्ता चलाता है वो पाँच वक़्त नज़र आता है नमाजों में मगर सुना है कि शब को जुआ चलाता है ये लोग पांव नहीं जेहन से अपाहिज हैं उधर चलेंगे जिधर रहनुमा चलाता है हम अपने बूढे चिरागों पे खूब इतराए और उसको भूल गए जो हवा चलाता है #Rahat_indori