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Kaidi Jo tha wo dil se khreedar ho gaya | Shayrana.org
क़ैदी जो था वो दिल से ख़रीदार हो गया यूसुफ़ को क़ैदख़ाना भी बाज़ार हो गया उल्टा वो मेरी रुह से बेज़ार हो गयामैं नामे-हूर ले के गुनहगार हो गया ख़्वाहिश जो रोशनी की हुई मुझको हिज्र मेंजुगनु चमक के शम्ए शबे-तार हो गया एहसाँ किसी का इस तने-लागिर से क्या उठेसो मन का बोझ साया -ए-दीवार हो गया बे-हीला इस मसीह तलक था गुज़र महाल,क़ासिद समझ कि राह में बीमार हो गया. जिस राहरव ने राह में देखा तेरा जमालआईनादार पुश्ते-ब-दिवार हो गया. क्योंकर मैं तर्क़े-उल्फ़ते-मिज़्गाँ करुँ अमीरमंसूर चढ़ के दार पे सरदार हो गया. Amir minai