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Hai dil ko shauk us but e qatil ki deed ka | Shayrana.org
है दिल को शौक़ उस बुत-ए-क़ातिल की दीद का होली का रंग जिस को लहू है शहीद कादुनिया परस्त क्या रहे उक़बा करेंगे तैनिकलेगा ख़ाक घर से क़दम ज़न मुरीद काहोने न पाए ग़ैर बग़लगीर यार सेअल्लाह यूँ ही रोज़ गुज़र जाए ईद कासारा हिसाब ख़त्म हुआ हश्र हो चुकापूछा गया न हाल तुम्हारे शहीद काजा के सफ़र में भूल गए हमको वो अमीर याँ और दोस्तों ने लिखा ख़त रसीद का Amir minai