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Maine is tour se chaha tujhe aksar jana | Shayrana.org
मैने इस तौर से चाहा तुझे अक्सर जाना जैसे महताब को बे -अंत समंदर चाहेजैसे सूरज की किरण सीप के दिल में उतरेजैसे खुशबू को हवा , रंग से हट कर चाहेजैसे पत्थर के कलेजे से किरण फूटती हैजैसे गुंचे खुले मौसम से हिना मांगते हैं जैसे ख्वाबों में खयालों की कमान टूटती हैजैसे बारिश की दुआ आबला -पा मांगते हैंमेरा हर ख्वाब मेरे सच की गवाही देगावुस 'अत -ए -दीद ने तुझ से तेरी ख्वाहिश की हैमेरी सोचों में कभी देख सरापा अपना !मैंने दुनिया से अलग तेरी परस्तीश की है ख्वाहिश -ए -दीद का मौसम कभी धुंधला जो हुआ नोच डाली हैं जमाने की नकाबें मैंने तेरी पलकों पे उतरती हुई सुबहों के लिएतोड़ डाली हैं सितारों की तनाबें मैंनेमैने चाहा कि तेरे हुस्न कि गुलनार फिजामेरी ग़ज़लों की कतारों से महकती जाएमैंने चाहा कि मेरे फ़न के गुलिस्ताँ की बहारतेरी आँखों के गुलाबों से महकती जाएतय तो ये था के सजते रहे लफ्जों के कंवल मेरे खामोश ख़यालों में तकल्लुम तेरारक्स करता रहे , भरता रहे , खुशबू का खुमार मेरी ख्वाहिश के जज़ीरों में तकल्लुम तेरातू मगर अजनबी माहौल की पर्वर्दा किरनमेरी बुझती हुई रातों को