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Ashaar mire yoon to zamane ke liye hai | Shayrana.org
अश्आर मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शे'र फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैं अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं आँखों में जो भर लोगे, तो काँटे-से चुभेंगे ये ख़्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं देखूँ तिरे हाथों को तो लगता है तिरे हाथ मन्दिर में फ़क़त दीप जलाने के लिए हैं सोचो तो बड़ी चीज़ है तहजीब बदन की वरना तो बदन आग बुझाने के लिए हैं ये इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं Jaan nissar akhtar