shayrana.org
Hamare bhay pe pabandi lagate hai | Shayrana.org
हमारे भय पे पाबंदी लगाते हैं अंधेरे में भी जुगनू मुस्कुराते हैं बहुत कम लोग कर पाते हैं ये साहस चतुर चेहरों को आईना दिखाते हैं जो उड़ना चाहते हैं उड़ नहीं पाते वो जी भर कर पतंगों को उड़ाते हैं नहीं माना निकष हमने उन्हें अब तक मगर वो रोज़ हमको आज़माते हैं उन्हें भी नाच कर दिखलाना पड़ता है जो दुनिया भर के लोगों को नचाते हैं बहुत से पट कभी खुलते नहीं देखे यूँ उनको लोग अक्सर खटखटाते हैं हमें वो नींद में सोने नहीं देते हमारे स्वप्न भी हम को जगाते हैं Zaheer quraishi