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Ulte seedhe sapne paale baithe hai | Shayrana.org
उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैं सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं इक बीमार वसीयत करने वाला है रिश्ते नाते जीभ निकाल बैठे हैं बस्ती का मामूल पे आना मुश्किल है चौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैं धागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों की सब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैं साहब-ज़ादा पिछली रात से ग़ायब है घर के अंदर रिश्ते वाले बैठे हैं आज शिकारी की झोली भर जाएगी आज परिंदे गर्दन डाले बैठे हैं Shakeel zamaali