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Safar se lout jaana chahta hai | Shayrana.org
सफ़र से लौट जाना चाहता है परिंदा आशियाना चाहता है कोई स्कूल की घंटी बजा दे ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है उसे रिश्ते थमा देती है दुनिया जो दो पैसे कमाना चाहता है यहाँ साँसों के लाले पड़ रहे हैं वो पागल ज़हर खाना चाहता है जिसे भी डूबना हो डूब जाए समंदर सूख जाना चाहता है हमारा हक़ रक्खा है जिस ने सुना है हज को जाना चाहता है Shakeel zamaali