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Dil ki har dhadkan hai battis meel me | Shayrana.org
‎ दिल की हर धड़कन है बत्तिस मील में । वो ज़िले में और हम तहसील में । उसकी आराइस की क़ीमत कैसे दूँ, दिल को तोला नाक की इक कील में । कुछ रहीने मय नहीं मस्ते ख़राम, सब नशा है सैण्डिल की हील में । यार किहकर मेरी सिगरेट खेंच ली किस क़दर बिगड़े हैं बच्चे ढील में । यक-ब-यक लहरों में दम-सी आ गई, लड़कियों ने पाँव डाले झील में । उम्र अदाकारी में सारी कट गई, इक ज़रा से झूठ की तावील में । हुक्म कर के देखिएगा तो हुज़ूर, सर है ह़ाज़िर हुक्म की तामील में । सैकड़ों ग़ज़लें मुकम्मल हो गईं, इक अधूरे शेर की तकमील में । Ana kasmi