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Usko number de ke meri | Shayrana.org
उसको नम्बर देके मेरी और उलझन बढ़ गई फोन की घंटी बजी और दिल की धड़कन बढ़ गई इस तरफ़ भी शायरी में कुछ वज़न-सा आ गया उस तरफ़ भी चूड़ियों की और खन-खन बढ़ गई हम ग़रीबों के घरों की वुसअतें मत पूछिए गिर गई दीवार जितनी उतनी आँगन बढ़ गई मशवरा औरों से लेना इश्क़ में मंहगा पड़ा चाहतें क्या ख़ाक बढ़तीं और अनबन बढ़ गई आप तो नाज़ुक इशारे करके बस चलते बने दिल के शोलों पर इधर तो और छन-छन बढ़ गई Ana kasmi