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Agar hamare hi dil me thikana chahiye tha | Shayrana.org
अगर हमारे ही दिल मे ठिकाना चाहिए था तो फिर तुझे ज़रा पहले बताना चाहिए था चलो हमी सही सारी बुराईयों का सबब मगर तुझे भी ज़रा सा निभाना चाहिए था अगर नसीब में तारीकियाँ ही लिक्खीं थीं तो फिर चराग़ हवा में जलाना चाहिए था मोहब्बतों को छुपाते हो बुज़दिलों की तरह ये इश्तिहार गली में लगाना चाहिए था जहाँ उसूल ख़ता में शुमार होते हों वहाँ वक़ार नहीं सर बचाना चाहिए था लगा के बैठ गए दिल को रोग चाहत का ये उम्र वो थी कि खाना कमाना चाहिए था - शकील जमाली