shayrana.org
Zindgi | Shayrana.org
हमारी ज़िन्दगी का इस तरह हर साल कटता है कभी गाड़ी पलटती है, कभी तिरपाल कटता है । दिखाते हैं पड़ोसी मुल्क़ आँखें, तो दिखाने दो कभी बच्चों के बोसे से भी माँ का गाल कटता है