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दलित रंगमंच का आदर्श वर्णवादी-व्यवस्था नहीं – राजेश कुमार | | सबलोग
राजेश कुमार भरतमुनि के नाट्यशास्त्र मे कहा गया है कि प्रेक्षागृह में यदि चारों वर्ण मसलन ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र उपस्थित न हों तो नाट्य की प्राथमिक शर्त पूरी नहीं होगी। नाटक में वर्णवादी