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लोककथा और बाल साहित्य – रेशमा त्रिपाठी | | सबलोग
रेशमा त्रिपाठी लोककथा और बाल साहित्य दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं क्योंकि लोककथा का उद्भव बाल जीवन से ही आरम्भ हो जाता हैं। लोककथा लोगों द्वारा किए गए कार्यों को शब्द साहित्य द्वारा रेखांकित कर कहान