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कैंसरकारक भी है नमक की अधिक मात्रा
आनंद कु. अनंतचरक संहिता में वर्णित है कि लवण रस जब शरीर के अनुकूल नहीं बैठता या मात्रा से अधिक सेवन किया जाता है तो पित्त को प्रकूपित एवं दूषित करता है, प्यास तथा गर्मी को बढ़ाता है, खून में गर्मी...
Md. Sadique