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कविता: 'तमाशा' - पुनीत कुसुम - पोषम पा
A poem inspired by Imtiaz Ali's movie 'Tamasha'. उन्मादकता की शुरुआत हो जैसे जैसे खुलते और बंद दरवाज़ों में खुद को गले लगाना हो जैसे कोनों में दबा बैठा भय आकर तुम्हारे हौसलों का माथा चूम जाए जैसे वो सत्य...