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कहानी: 'आहुति' - प्रेमचंद - पोषम पा
Hindi Kahani: 'Aahuti' by Premchand. आनन्द ने गद्देदार कुर्सी पर बैठकर सिगार जलाते हुए कहा- आज विशम्भर ने कैसी हिमाकत की! इम्तहान करीब है और आप आज वालण्टियर बन बैठे। कहीं पकड़ गये, तो इम्तहान से हाथ धोएँगे। मेरा तो खयाल है कि वजीफ़ा भी बन्द हो जाएगा। सामने दूसरे बेंच पर रूपमणि बैठी एक अखबार पढ़ रही थी।...