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कोशिश - Itchy hands and a travel bag!
पहाड़ों की चोटियों पे एड़ियां टिका के ठंडी हवाओं से दो पल यूं बातें मैं कर लूं कुछ अपनी कहूँ कुछ उसकी सुनूँ और.. बहती नदी के बिछड़े इन छोरों को तर लूँ डालों पर बैठी इस कोयलिया के गीतों में दो छंद अपनी इस आशा के जोड़ूँ थोड़ा चलूँ और थोड़ा रुकूँ मैं किलसाते …