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कान्हा तूने प्रीत सिखाई | अनुपमा वर्मा
नीरस लगता था हर एक क्षण नाउम्मीद था हर एक कल शून्य था मै स्वयं मे अब तक तूने पूर्णता की ज्योत जगाई मन को मेरे दिशा दिखाई कान्हा तूने प्रीत सिखाई जग की रोशनीContinue reading