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हर रात तन्हा गुजर जाती है | ‘उपासना पाण्डेय’ आकांक्षा
आज हर शाम तन्हा गुजर जाती है, किसी की याद में आंखे भर जाती है, बेचैनियों में काटती है मेरी राते, हर रात तन्हा गुजर जाती है, कोई शामिल नही मेरे दर्द में तेरे सिवा,Continue reading