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गुस्ताख़ मुरीद | निकिता राज पुरोहित
गुस्ताखी करने का इरादा न था हमारा, पर इस ज़बान ने सी कर इक लंबा अर्सा था गुज़ारा। अब जब सारा दर्द बिखेर ही दिया है, माफ़ कर जाने दो, कुछ इतना भी बुरा नहींContinue reading