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मी लॉर्ड, कम-से-कम स्वाधीन परिवेश के जीवन को तो क़ानूनी बाध्यताओं में न जकड़ें..
-ओम थानवी॥ राष्ट्रगान और तिरंगा हमारा गौरव हैं, हम आज़ाद हैं इसकी मुखर गवाही। लेकिन उसे लेकर क्या इन दिनों हम नाहक फ़िक़्रमंद नहीं हुए जा रहे? अब सर्वोच्च न्यायालय भी जैसे इस फ़िक़्र में शरीक़ हो ग…