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प्यार की हार
55 वर्षीय चित्तरंजन बाबू एक निजी कंपनी में लिपिक थे। पत्नी दो वर्ष पहले ही अलविदा कह चुकी थी। एक बेटा था-निखिल। विलायत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। जीवन का दो-तिहाई गुजार चुके चित्तरंजन बाबू बहुत ही ईमानदार,कर्मठ,सत्य-प्रेमी और इज्जतदार व्यक्ति थे। आस-पड़ोस के लोगों से लेकर ऑफिस के मैनेज़र तक