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मेरा गांव
मुझे याद है मै भूला नही मेरे गाँव की वो सर्दियां वो छाँव पीपल का घना वो धूप की कुछ जर्दियां! मेरे दिल मे आज भी है बसी गलिंयां हमारे गांव की मुझे अपने शहर से बेदखल जरूरतों ने कर दिया!! जो हरा भरा था चमन कभी खिजा में शायद उजड़ गया ये नसीबों की है दास्तां क्या संवर गया