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😊😊 चाहत 😊😊
आज फिर तुमसे बात करने का मन करता है। इकरार-ए- मोहब्बत को इज़हार करने का दिल करता है। जानती हूँ मैं, मुझसे तुम बहुत दूर हो। चाहते हुए भी इस पल आ नहीं सकते। फिर भी क्यों, तुम्हें देखने का दिल करता है ? क्या करूँ मैं , बहुत समझाया इस नादान को। सिर्फ़ तुम्हारे क़रीब, रहने का दिल करता है। कैसी है लगन, यह मेरे मन को